Saturday, October 27, 2007

तुम न आये ....

तुम न आये

रात भर रोती रहीं तन्हाइयां



तुम आओगे....

बस्स अभी आ जाओगे

साथ मेरे जागती सोती रहीं परछाईयाँ




घूम-घूम कर मेघ आये

बिन बरसे ही चले गए

शूल मेरे तुम चुभोती रहीं पुरवाईयाँ



छोड़कर मुझको गए तुम

राह मे ऐ हमसफ़र

पर न मुझको छोड़ती हैं ये मेरी रूसवाईयाँ

1 comment:

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत बढिया गीत लिखा है।बधाई।

छोड़कर मुझको गए तुम

राह मे ऐ हमसफ़र

पर न मुझको छोड़ती हैं ये मेरी रूसवाईयाँ